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रक्षा निर्यात के नियम बदले, भारतीय कंपनियों के लिए ग्लोबल मार्केट आसान
Shantanu Roy
28 Aug 2026 8:01 PM IST

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New Delhi. नई दिल्ली। भारत सरकार ने देश की रक्षा कंपनियों को वैश्विक बाजार में आगे बढ़ाने के लिए रक्षा निर्यात से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। रक्षा मंत्रालय ने रक्षा उपकरणों के निर्यात की मानक संचालन प्रक्रिया और ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस यानी ओजीईएल की व्यवस्था को सरल बनाने का फैसला किया है। सरकार का उद्देश्य रक्षा उत्पादों के निर्यात में आने वाली प्रक्रियात्मक अड़चनों को कम करना और भारतीय कंपनियों के लिए विदेशी बाजारों में कारोबार के अवसर बढ़ाना है। नई व्यवस्था से खासतौर पर भारतीय रक्षा कंपनियों और एमएसएमई क्षेत्र को लाभ मिलने की उम्मीद है। पहले निर्यात से जुड़ी कई प्रक्रियाओं के कारण कंपनियों को अलग-अलग स्तर पर मंजूरी और औपचारिकताओं से गुजरना पड़ता था। अब कम जोखिम वाले रक्षा उत्पादों के निर्यात को आसान बनाने पर जोर दिया गया है।
ओजीईएल की वैधता अब तीन साल
सरकार ने ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस की वैधता अवधि को भी बढ़ाया है। पहले यह लाइसेंस दो साल के लिए मान्य होता था, जिसे अब बढ़ाकर तीन साल कर दिया गया है। इस बदलाव से रक्षा कंपनियों को बार-बार लाइसेंस के नवीनीकरण की प्रक्रिया से राहत मिलेगी। इससे समय और प्रशासनिक खर्च कम होने की संभावना है। कंपनियां विदेशी खरीदारों के साथ अपने कारोबारी समझौतों को ज्यादा आसानी से आगे बढ़ा सकेंगी। नई व्यवस्था में प्रमुख रक्षा प्लेटफॉर्म, कलपुर्जों और तकनीक हस्तांतरण से संबंधित अलग-अलग प्रक्रियाओं को एकीकृत करने की दिशा में कदम उठाया गया है। इसका मकसद रक्षा निर्यात की प्रक्रिया को अधिक सरल और व्यवस्थित बनाना है।
विदेशी टेंडर और डिफेंस एक्सपो में भाग लेना आसान
नए नियमों का असर अंतरराष्ट्रीय रक्षा प्रदर्शनियों और विदेशी टेंडर्स में भाग लेने वाली भारतीय कंपनियों पर भी पड़ेगा। नियमों को सरल किए जाने से कंपनियों के लिए विदेशों में आयोजित होने वाले डिफेंस एक्सपो में अपने उत्पाद और तकनीक प्रदर्शित करना आसान होगा। सरकार के इस कदम से भारतीय रक्षा उत्पादों को वैश्विक स्तर पर ज्यादा पहचान मिलने की उम्मीद है। कंपनियां नए बाजारों की तलाश कर सकेंगी और संभावित विदेशी ग्राहकों तक अपने उत्पाद पहुंचाने के अवसर बढ़ेंगे। इसके अलावा गैर-घातक रक्षा उपकरणों के निर्यात के लिए भी प्रक्रिया को आसान किया गया है। अधिकांश देशों के लिए ऐसे उपकरणों के निर्यात में अतिरिक्त परामर्श की जरूरत को कम किया गया है।
41 देशों से बढ़कर लगभग पूरी दुनिया तक दायरा
ओजीईएल की सुविधा के दायरे में भी विस्तार किया गया है। पहले यह व्यवस्था 41 चुनिंदा देशों तक सीमित थी। अब इसका दायरा काफी व्यापक किया गया है, जिससे भारतीय कंपनियों को नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश करने का अवसर मिलेगा। हालांकि संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों वाले देशों और कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। यानी नियमों में आसानी के बावजूद राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जुड़े मामलों में मौजूदा निगरानी बनी रहेगी। विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं के साथ लंबे समय से समझौते रखने वाली भारतीय कंपनियों के लिए भी विशेष निर्यात मंजूरी की व्यवस्था की गई है। इससे वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बनने वाली भारतीय कंपनियों को कारोबार बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
छोटे कलपुर्जों और सुरक्षा उपकरणों पर भी राहत
संशोधित नीति में छोटे कैलिबर के हथियारों के कुछ कलपुर्जों और नागरिक इस्तेमाल वाले सुरक्षा उपकरणों के निर्यात को भी आसान बनाया गया है। इससे वैध अंतरराष्ट्रीय कारोबार के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि नियमों को सरल करने का मतलब सुरक्षा व्यवस्था में ढील देना नहीं है। संवेदनशील रक्षा उपकरणों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर आवश्यक निगरानी जारी रहेगी। सरकार का फोकस ऐसे रक्षा कारोबार से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर है, जिनमें जोखिम अपेक्षाकृत कम है और जहां अनावश्यक कागजी प्रक्रिया कंपनियों के लिए बाधा बनती है।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा भारत का रक्षा उत्पादन
रक्षा क्षेत्र में यह बदलाव ऐसे समय किया गया है, जब भारत का रक्षा उत्पादन और निर्यात लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की जानकारी दी गई है। इसी अवधि में भारत का रक्षा निर्यात भी बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। सरकार द्वारा निर्यात प्रक्रिया को आसान बनाने के बाद आने वाले समय में भारतीय रक्षा कंपनियों की विदेशी बाजारों में पहुंच और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। नए नियमों से भारतीय कंपनियों को विदेशी खरीदारों, टेंडर्स और अंतरराष्ट्रीय रक्षा प्रदर्शनियों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। सरकार की व्यापक कोशिश भारत को रक्षा विनिर्माण और निर्यात के क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की है।
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